CBSE Class 11 Sanskrit शब्दरूपाणि


CBSE Class 11 Sanskrit शब्दरूपाणि

शब्दों के अन्त में लगने वाले कारक-चिहनों को सुप् कहते हैं। इन सुप् (स, औ, अः आदि) प्रत्यय को लगाने से जो शब्द बनते हैं, उन्हें सुबन्त कहते हैं। जैसे-रामः, रामौ, रामाः आदि। सुप् प्रत्ययों के मूल रूप और अवशिष्ट रूप छात्रों की सुविधा के लिए दिए जा रहे हैं। सुप् प्रत्ययों के अवशिष्ट रूप हलन्त शब्दों में प्रायः सीधे जुड़ जाते हैं तथा कोई परिवर्तन नहीं होता, किन्तु अजन्त शब्दों में जुड़ते समय इन अवशिष्ट रूपों में कुछ स्थानों पर परिवर्तन रहता है।

सुप्-प्रत्यय

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प्रातिपदिक – धातु, प्रत्यय और प्रत्ययान्त को छोड़कर सार्थक शब्द को प्रातिपदिक कहते हैं। कृत्-प्रत्ययान्त, तद्धित-प्रत्ययान्त और समास (समस्त-पद) को भी प्रातिपदिक कहते हैं। प्रतिपदिक शब्दों को अजन्त तथा हलन्त दो भागों में बाँटा जाता है।

I. अजन्त
अजन्त शब्दों में अकारान्त, आकारान्त, इकारान्त, ईकारान्त, उकारान्त, ऊकारान्त तथा ऋकारान्त आदि होते हैं। अकारान्त पुल्लिङ्ग व नपुंसकलिङ्ग दो प्रकार के शब्द हैं –

1. (क) अकारान्त पुल्लिङ्ग

बालक
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(ख) अकारान्त नपुंसकलिङ्ग
फल
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वाक्य प्रयोग – उपर्युक्त अकारान्त शब्द-रूपों का प्रयोग निम्न प्रकार से होगा।

बालक के शब्द-रूपों का प्रयोग –

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फल के शब्द-रूपों का प्रयोग –

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2. आकारान्त स्त्रीलिङ्ग
रमा (लक्ष्मी)

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विशेष – सीता, गंगा, यमुना, निन्दा, कला, कक्षा, कान्ता आदि शब्दों के रूप रमा की भाँति चलेंगे किन्तु रमा शब्द के षष्टी बहुवचन में तो ‘न्’ का ‘ण’ होने से रमाणाम् रूप होता है पर उपर्युक्त शब्दों के रूपों में नहीं होगा। आकारान्त शब्दों के सप्तमी बहुवचन में ‘सु’ का षु नहीं होता है। जैसे-लतासु, रमासु (अकारान्त शब्द रूपों में षु, यथा देवेषु, रामेषु, गृहेषु)।

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3. इकारान्त
इकारान्त शब्द पुल्लिङ्ग, नपुंसकलिङ्ग तथा स्त्रीलिङ्ग तीनों में होते हैं।

(क) इकारान्त पुल्लिङ्ग
कवि
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पति
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(ख) इकारान्त नपुंसकलिङ्ग
वारि (जल)
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(ग) इकारान्त स्त्रीलिङ्ग
मति (बुद्धि)
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मति के समान ही बुद्धि, गति, रति, शुद्धि, भक्ति, स्मृति, शान्ति, रीति, नीति, श्रुति, जाति, पंक्ति, रात्रि, गति, धूलि, रुचि, कृति तथा मूर्ति आदि शब्दों के रूप होते हैं। रात्रि शब्द के षष्टी बहुवचन में ‘रात्रीणाम्’ रूप होता है।

वाक्य प्रयोग – उपर्युक्त इकारान्त शब्द रूपों का वाक्यों में प्रयोग निम्न प्रकार से होगा

कवि के शब्द-रूपों का प्रयोग –

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पति के शब्द रूपों का प्रयोग –

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वारि के शब्द रूपों का प्रयोग –

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मति के शब्द रूपों का प्रयोग –

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4. ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग
नदी

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दासी, जननी, रात्री, महिषी, रजनी आदि ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप नदी के समान होंगे। रात्री का षष्ठी बहुवचन का रूप ‘रात्रीणाम्’ होगा। गच्छन्ती (जाती हुई), पठन्ती (पढ़ती हुई) इत्यादि शत्रन्त (शतृ अन्त) शब्दों के रूप भी नदी की भाँति चलेंगे।

वाक्य प्रयोग – उपर्युक्त नदी शब्द के रूपों का प्रयोग निम्न प्रकार से होगा –

नदी के शब्द रूपों का प्रयोग –

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5. उकारान्त

उकारान्त शब्दों में पुल्लिङ्ग, नपुंसकलिङ्ग तथा स्त्रीलिङ्ग तीनों प्रकार के शब्द मिलते हैं।

(क) उकारान्त पुल्लिङ्ग
शिशु

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(ख) उकारान्त नपुंसकलिङ्ग
मधु

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(ग) उकारान्त स्त्रीलिङ्ग
धेनु (गाय)

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रज्जु, चज्जु, रेणु, तनु, शतद्रु आदि उकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप धेनु के रूपों की भाँति चलते हैं।

उकारान्त शब्द रूपों का वाक्यों में प्रयोग –

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6. ऊकारान्त स्त्रीलिङ्ग
वधू (बहु)

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श्वश्रू (सास), चमू (सेना), चम्पू (गद्यपद्यमयी रचना), यवागू (मांड) तथा कर्कन्धू (बेर) आदि ऊकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप वधू के समान होंगे।

ऊकारान्त शब्दरूपों का वाक्यों में प्रयोग

वधू शब्द के रूपों का प्रयोग –

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7. ऋकारान्त पुल्लिङ्ग
पितृ

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कर्तृ, पुल्लिङ्ग

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कर्तृ, नपुंसकलिङ्ग

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ऋकारान्त शब्द-रूपों का वाक्य प्रयोग –

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II. हलन्त (पु०) शब्दों के रूप

हलन्त पुल्लिङ्ग शब्दों में नकारान्त (राजन्, आत्मन्), सकारान्त (विद्वस, चन्द्रमस्), तकारान्त (भवत्, गच्छत्) तथा हलन्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों में वाच् शब्दों के रूप पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं।

1. नकारान्त शब्द, पुल्लिङ्ग

राजन् (राजा)

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आत्मन् (आत्मा)

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अध्वन् (मार्ग), अश्मन् (पत्थर) तथा मूर्धन् (सिर) शब्दों के रूप आत्मन् के समान चलेंगे।

2. सकारान्त शब्द, पुल्लिङ्ग
विद्वस् (विद्वान्)

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चन्द्रमस् (चाँद)

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3. तकारान्त शब्द, पुल्लिङ्ग
भवत् (आप)

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गच्छत् (जाता हुआ), पुल्लिङ्ग

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हलन्त स्त्रीलिङ्ग शब्द

हलन्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों में केवल वाच शब्द के रूप ही पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं।

वाच् (वाणी)

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निम्नलिखित चकारान्त शब्दों के रूप भी ऊपर दिए हुए वाच शब्द के रूपों के समान होते हैं –
रुच् (कान्ति), शुच् (शोक), त्वच् (खाल), ऋच् (ऋग्वेद का मन्त्र), स्त्रुच् (स्त्रुवा)।

हलन्त शब्दों का वाक्यों में प्रयोग –

प्रथमा विभक्ति –

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पंचमी विभक्ति

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षष्ठी विभक्ति –

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सप्तमी विभक्ति –

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सम्बोधन –

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III. सर्वनाम (Pronoun)

सर्वनाम शब्दों के रूप सम्बोधन में नहीं होते। सर्वनाम शब्दों में तत्, यत्, किम्, इदम् तथा अस्मद् व युष्मद् के रूप पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं। अस्मद् तथा युष्मद् को छोड़कर शेष शब्दों के रूप तीनों लिङ्गों में पृथक्-पृथक् होते हैं। अस्मद् तथा युष्मद् के रूप तीनों लिङ्गों में एक समान होते हैं।

1. तत्
तत् (वह), पुल्लिङ्ग
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तत् (वह), नपुंसकलिङ्ग

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तृतीया से लेकर सप्तमी विभिक्ति तक तत् नपुंसकलिङ्ग के तीनों वचनों में वही रूप बनते हैं। जो तत् पुल्लिङ्ग के इन विभक्तियों के तीनों वचनों में रूप होते हैं यथा-तेन, ताभ्यां, तैः इत्यादि

तत् ( वह स्त्री), स्त्रीलिङ्ग

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2. यत्
यत् (जो पुरुष), पुल्लिङ्ग

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यत् (जो वस्तु), नपुंसकलिङ्ग

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यत् (जो स्त्री), स्त्रीलिङ्ग

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3. किम्
किम् (कौन पुरुष), पुल्लिङ्ग)

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किम् (कौन वस्तु), नपुंसकलिङ्ग

किम् (कौन वस्तु), नपुंसकलिङ्ग

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तृतीया से सप्तमी विभिक्ति तक के रूप पुल्लिङ्ग रूपों के समान बनते हैं।

किम् (कौन स्त्री), स्त्रीलिङ्ग
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4. इदम्
इदम् (यह), पुल्लिङ्ग
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इदम् ( यह), नपुंसकलिङ्ग
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इदम् (यह), स्त्रीलिङ्ग
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5. अस्मद्
अस्मद् (मैं), सर्वलिङ्ग
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6. युष्मद्
युष्मद् (तुम), सर्वलिङ्ग
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7. सर्व
सर्व, पुल्लिङ्ग (सब पुरुष)
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सर्व, नपुंसकलिङ्ग (सब वस्तुएँ)
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सर्व, स्त्रीलिङ्ग (सब स्त्रियाँ)
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सर्वनाम शब्द-रूपों का वाक्य में प्रयोग –

प्रथमा विभक्ति एकवचन –
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प्रथमा विभक्ति द्विवचन –
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प्रथमा विभक्ति बहुवचन –
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द्वितीया विभक्ति –
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तृतीया विभक्ति –
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चतुर्थी विभक्ति –
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पञ्चमी विभक्ति –
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षष्ठी विभक्ति –
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सप्तमी विभक्ति –

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IV. संख्यावाचक शब्द

एक = एक
(केवल एकवचन में तीनों लिङ्गों में पृथक्-पृथक् रूप होते हैं।)
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द्वि = दो (केवल द्विवचन में रूप होते हैं।)
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त्रि = तीन
(केवल बहुवचन में रूप होते हैं)
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चतुर् = चार
(केवल बहुवचन में रूप होते हैं।)
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विशेष – पञ्चन्, षष्, सप्तन्, अष्टन्, नवन्, दशन् के तीनों लिंगों में समान रूप होते हैं।
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मिश्रित-अभ्यासः

1. अधोलिखित-शब्दानां रूपाणि लिखित्वा रिक्तस्थानानि पूर्यन्ताम्
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2. अधोलिखित-शब्दानां रूपाणि लिखित्वा रिक्तस्थानानि पूर्यन्ताम्
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3. अधोलिखित-मञ्जषायां केचन शब्दाः लिखिताः सन्ति। तेषु अजन्त-हलन्त-सर्वनाम-संख्यावाचक-शब्दान् यथानिर्दिष्टस्थानं पृथक्-पृथक् लिखत –
मञ्जूषा
बालक, सर्व, राजन्, एक, फल, द्वि, यत्, गच्छत्, रमा, भवत्, त्रि, तत्, चतुर्, किम्, आत्मन्, कवि, विद्वस्, पति, इदम्, मति, कर्तृ, अस्मद्, पञ्च, वारि, षष्, नदी, चन्द्रमस्, शिशु, वान्, युष्मद्, सप्त, धेनु, अष्ट, मधु, अष्ट, वधू, नव, पितृ, दश, मातृ।
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4. कोष्ठकात् शब्दरूपाणाम् उचित विभक्तिपदं चित्वा वाक्यपूर्तिः क्रियताम्

  1. ………………… आविर्भावः।(रामायणस्य, रामायणेन)
  2. ……………. अभितः वृक्षाः सन्ति। (नद्याः, नदीम्)
  3. …………….. एव बलात् गरीयसी। (मतिः, मतिम्)
  4. ………….. गणनाप्रसंगे कनिष्ठिकाधिष्ठित कालिदासः। (कविभ्यः, कवीनाम्)
  5. ……………. जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। (जननी, जननीम्)
  6. …………………. आलापान् आकर्णयन् सः निशाम् अनैषीत्। (पितुः, पितुस्य)
  7. ……………….. नाम किम्? (भवान्, भवतः)
  8. ……………… नाम विनोदः। (माम्, मम)
  9. ……………… गृहं कुत्र वर्तते? (तव, त्वम्)
  10. ……………… कालिदासः श्रेष्ठः। (कविषु, कविभ्यः)
  11. आसीत् पुरा शूद्रको नाम ……………। (राजा, राज:)
  12. …………….. कुत्र गच्छन्ति? (विद्वान्, विद्वांसः)
  13. …………….. रात्रौ शोभते। (चन्द्रः, चन्द्रेण)
  14. अहं ………………. सह न गमिष्यामि। (त्वाम्, त्वया)
  15. ………………. दुग्धं रोचते। (बालकम्, बालकाय)
  16. इमानि ……………… क: नेष्यति? (फलानाम्, फलानि)
  17. वृक्षे ……………… चटकाः सन्ति। (तिस्त्रः, त्रयः)
  18. अहं ……………… सर्पान् अपश्यम्। (चतुरः, चत्वारः)
  19. वृक्षात् ………………… पत्राणि पतन्ति। (त्रीणि, त्रयः)
  20. ………………. लते नमतः। (लते. लता)

5. अधोलिखितान् उचितविभक्तिपदान् चित्वा वाक्यपूर्तिः क्रियताम्।
(i) …………… प्रकाशन अन्धकारः नश्यति।
(क) भानुम्
(ख) भानवे
(ग) भानोः
(घ) भान्वोः

(ii) गुरुः ……………….. आशीर्वादं यच्छति।
(क) छात्रान्
(ख) छात्रेभ्यः
(ग) छात्राः
(घ) छात्रम्

(iii) या श्रमण पठति ……………… एव साफल्यं लभते।
(क) सा
(ख) सः
(ग) ते:
(घ) तत्

(iv) ……………… अनुजः नवमकक्षायां पठति।
(क) माम्
(ग) मत्
(घ) मह्यम्

(v) …………… आज्ञा हि अविचारणीया।
(क) गुरुभिः
(ख) गुरूणाम्
(ग) गुरुभ्यः
(घ) गुरवः

(vi) ………………… शोभते नरः।
(क) विद्यया
(ख) विद्यायाः
(ग) विद्यायै
(घ) विद्यायाम्

(vii) अहम् ……………………. निमन्त्रणपत्रं दास्यामि।
(क) युष्मभ्यम्
(ख) त्वाम्
(ग) त्वया
(घ) त्वयि

(viii) …………………………… सरोवरे नीलकमलानि सन्ति।
(क) अस्य
(ख) अस्मिन्
(ग) अनयोः
(घ) अस्मै

6. अधोलिखितवाक्येषु उचितविभक्तियुक्तपदैः रिक्तस्थानपूर्तिः क्रियताम्।

(i) अद्य ……………… जन्मदिनम् अस्ति।
(क) माम्
(ख) मम
(ग) अहम्
(घ) मह्यम्

(ii) अहम् …………………. आम्रवृक्षम् आरोपयामि।
(क) वाटिकायाम्
(ख) वाटिकाम्
(ग) वाटिका
(घ) वाटिकानाम्

(iii) तत्पश्चात् ………………… चणकान् दास्यामि।
(क) कपीन्
(ख) कपिभ्यः
(ग) कपीनाम्
(घ) कपिभिः

(iv) यानि मम मित्राणि सन्ति ……… अपि वर्धापनं दातुम् आगमिष्यन्ति।
(क) ते
(ख) तान्
(ग) तानि
(घ) तम्

(v) गुरूणाम् ………… हि अविचारणीया।
(क) आज्ञाम्
(ख) आज्ञा
(ग) आज्ञया
(घ) आज्ञायाः

(vi) …………… विद्यया शोभते।
(क) नरः
(ख) नरस्य
(ग) नरम्
(घ) नरेषु

(vii) अहम् …………. निमन्त्रणपत्रं दास्यामि।
(क) तुभ्यम्
(ख) त्वाम्
(ग) त्वया
(घ) तव

(viii) ……………. सरोवरे नीलकमलानि सन्ति।
(क) अस्य
(ख) अस्मिन्
(ग) अस्याम्
(घ) अस्मै

7. अधोलिखिते कोष्ठके प्रदत्तं निर्देशानुसारं समुचितविभक्तिपदेन रिक्तस्थानानि पूरयत।

(i) जनाः ……………. प्रणमन्ति।
(मुनि-द्वितीया)
(क) मुनिम्
(ख) मुनीः
(ग) मुन्योः
(घ) मुनये

(ii) पुत्री ……………. पुष्पाणि यच्छति।
(मातृ-चतुर्थी)
(क) मातुः
(ख) मात्रोः
(ग) मात्रा
(घ) मात्रे .

(iii) …………… कक्षायां बालिकाः पठन्ति। (इदम्-सप्तमी)
(क) अस्मिन्
(ख) अनयोः
(ग) आसाम्
(घ) अस्याम्

(iv) ……………. सह त्वम् विद्यालयं गच्छसि? (किम्-तृतीया)
(क) केन
(ख) कस्मै
(ग) कस्याम्
(घ) कम्

(v) वृक्षाणाम् सुरक्षा ……………… परमं कर्त्तव्यम्। (अस्मद्-षष्ठी)
(क) मह्यम्
(ख) मम
(ग) अस्माकं
(घ) मयि

(vi) जननी जन्मभूमिश्च ……………. अपि गरीयसी। (स्वर्ग-पंचमी)
(क) स्वर्गस्य
(ख) स्वर्गम्
(ग) स्वर्गेण
(घ) स्वर्गात्

(vii) ………………….. गंगा सर्वश्रेष्ठा।
(नदी-सप्तमी)
(क) नदीषु
(ख) नद्याम्
(ग) नदीभिः
(घ) नदी:

(viii) चन्द्रमा ……………….. प्रकाशं लभते।
(भानु-पंचमी)
(क) भान्वोः
(ख) भानोः
(ग) भानूनाम्
(घ) भानुभ्यः

(ix) या बालिका दिल्लीतः आगता ………….. नाम सौम्या अस्ति। (तत्-षष्ठी)
(क) तस्याः
(ख) तस्य
(ग) तयोः
(घ) तस्यै

8. अधोलिखितेभ्यः पदेभ्यः उचितविभक्तियुक्तं पदं चित्वा वाक्यपूर्तिः क्रियताम्।

(i) भिक्षुकः …………… (नेत्र) काणः अस्ति।
(क) नेत्रयोः
(ख) नेत्रात्
(ग) नेत्रेण
(घ) नेत्राभ्याम्

(ii) ……………. (ग्राम) बहिः जलाशयः अस्ति।
(क) ग्रामात्
(ख) ग्रामस्य
(ग) ग्रामम्
(घ) ग्रामाय

(iii) …………. (कृष्ण) परितः गोपाः सन्ति।
(क) कृष्णस्य
(ख) कृष्णम्
(ग) कृष्णात्
(घ) कृष्णाय

(iv) …………. (श्रीगणेश) नमः।
(क) श्रीगणेशम्
(ख) श्रीगणेशेण
(ग) श्रीगणेशाय
(घ) श्री गणेशस्य

(v) …………….. (बालक) दुगधं रोचते।
(क) बालकम्
(ख) बालकाय
(ग) बालकेन।
(घ) बालकस्य

(vi) …………….. (ज्ञान) ऋते न सुखम्।
(क) ज्ञानात्
(ख) ज्ञानस्य
(ग) ज्ञानेन
(घ) ज्ञानम्

(vii) दुष्टे ……………. (मित्र) मा विश्वसेत्।
(क) मित्रे
(ख) मित्रम्
(ग) मित्रस्य
(घ) मित्रेण

(viii) …………… उत्सवे बहवः जनाः सम्मिलिताः। (इदम्)
(क) अस्मिन्
(ख) अस्याम्
(ग) अनयोः
(घ) एतेषु

(ix) महापुरुषाः स्व ………………….. जीवन्ति। (कीर्ति)
(क) कीतर्या
(ख) कीर्त्या
(ग) कीर्तिः
(घ) कीयौ

(x) …………… क: गमिष्यति? (शोभायात्रा)
(क) शोभायात्राम्
(ख) शोभायात्राः
(ग) शोभायायाम्
(घ) शोभायात्रया

(xi) रोगी ……………… सह औषधं खादति। (मधु)
(क) मधुनः
(ख) मधुम्
(ग) मधुना
(घ) मधुनोः

(xii) अस्यां ……………… मम विश्वासः अस्ति।
(क) मातरि
(ख) मातृषु
(ग) मातरः
(घ) मात्रे

9. अधोलिखितान् उचितविभक्तियुक्तं पदं चित्वा वाक्यपूर्तिः क्रियताम्।

(i) ……………….. कक्षायाम् चत्वारिंशत् छात्राः सन्ति।
(क) अस्याम्
(ख) अस्मिन्
(ग) अयम्
(घ) अस्याः

(ii) तडागे
तडागे ……………. शोभन्ते।
(क) कमला:
(ख) कमलानि
(ग) कमलम्
(घ) कमलेभ्यः

(iii) मम ……………. कार्यालयः उदयनगरे अस्ति।
(क) मातायाः
(ख) मातुः
(ग) मातस्य
(घ) पुत्रीम्

(iv) हे ………………….! त्वम् धन्या असि।
(क) पुत्री
(ख) पुत्रि
(ग) पुत्रे
(घ) पुत्रीम्

(v) वने ……….. इतस्तत: निर्भयाः भ्रमन्ति
(क) पशाः
(ख) पशवः
(ग) पशवाणि
(घ) पशुभिः

(vi) मृगाः …………….. सह चरन्ति।
(क) मृगैः
(ख) मृगात्
(ग) मृगस्य
(घ) मृगान्

(vii) …………….. गृह कुत्र अस्ति?
(क) त्वाम्
(ख) तव
(ग) त्वम्
(घ) त्वयि

(viii) सः प्रतिदिनं ………… नमति।
(क) पित्रे
(ख) पितरम्
(ग) पित्रम्
(घ) पितृन्

(ix) ………. अत्र आगच्छ।
(क) त्वाम्
(ख) त्वम्
(ग) तुभ्यम्
(घ) तव

(x) ………… शोभां पश्य।
(क) शाखायाः
(ख) शाखाम्
(ग) शाखायाम
(घ) शाखया

(xi) सर्वत्र ………………. प्रकाशः अस्ति।
(क) भानोः
(ख) भानुस्य
(ग) भान्वोः
(घ) भानूनाम्

(xii) तत्र …………. पाठयतः।
(क) शिक्षकः
(ख) शिक्षको
(ग) शिक्षकाः
(घ) शिक्षकान्

10. अधोलिखितानां स्थूलपदानां उचितां विभक्तिं चित्वा लिखत।

(i) वानरः वृक्षात् पतति।
(क) तृतीया
(ख) पंचमी
(ग) षष्ठी
(घ) प्रथमा

(ii) हे लते! इह आगच्छ।
(क) सम्बोधन
(ख) प्रथमा
(ग) तृतीया
(घ) चतुर्थी

(iii) त्वं केषाम् महापुरुषाणां नामानि जानासि?
(क) पंचमी
(ख) तृतीया
(ग) द्वितीया
(घ) षष्ठी

(iv) उद्याने अनेकानि पुष्पाणि सन्ति।
(क) प्रथमा
(ख) द्वितीया
(ग) तृतीया
(घ) चतुर्थी

(v) शीलं नरस्य परं भूषणम्।
(क) तृतीया
(ख) षष्ठी
(ग) पंचमी
(घ) प्रथमा

(vi) यः परेभ्यः सर्वमर्पयति तस्मै तरवे नमः।
(क) चतुर्थी
(ख) द्वितीया
(ग) प्रथमा
(घ) षष्ठी

(vii) श्रीकृष्णेन सह सुदामा अपि आश्रमे पठति स्म।
(क) द्वितीया
(ख) प्रथमा
(ग) षष्ठी
(घ) तृतीया

(viii) छात्रः पुस्तकम् विना विद्यालयं न आगच्छतु।
(क) प्रथमा
(ख) तृतीया
(ग) द्वितीया
(घ) षष्ठी

(ix) भट्टाचार्यः अध्ययनस्य हेतोः विदेशं गच्छति।
(क) षष्ठी
(ख) सप्तमी
(ग) प्रथमा
(घ) तृतीया

11. अधोलिखितेषु पदेषु उचितं शब्दरूपं चित्वा वाक्यपूर्तिः क्रियताम्।

(i) ……….. पतिः एव विष्णुः अस्ति।
(क) रमा
(ख) रमायाः
(ग) रमाम्
(घ) रमाणाम्

(ii) …………………………………….. गङ्गा श्रेष्ठा ।
(क) नदीभ्यः
(ख) नदीनाम्
(ग) नदीभिः
(घ) नदीसु

(iii) हे ईश्वर! ………….. रक्षस्व।
(क) मयि
(ख) माम्
(ग) मे

(iv) ……………. अनवद्यानि कर्माणि तानि सेवितव्यानि।
(क) याः
(ख) ये
(ग) यानि

(v) वृक्षाणां सुरक्षा …………… परमं कर्त्तव्यम्।
(क) अस्मै
(ख) अस्माकं
(ग) अस्मिन्

(vi) जननी ………………….. सेवते।
(क) पुत्राय
(ख) पुत्रस्य
(ग) पुत्रम्
(घ) पुत्रे

(vii) गङ्गा सर्वश्रेष्ठा।
(क) नदीषु
(ख) नद्याम्
(ग) नदीम्
(घ) नद्याः

(viii) चन्द्रमाः …………… प्रकाशं लभते।
(क) भानुम्
(ख) भानुना
(ग) भानोः
(घ) भानून्

(ix) ते सर्वान् ………………… नमन्ति।
(क) गुरुम्
(ख) गुरवे
(ग) गुरून्
(घ) गुरवः

12. कोष्ठकेषु प्रदत्तेभ्यः पदेभ्यः समुचितविभक्तियुक्तं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत।

(i) शिष्यः (गुरु) ……………… पुष्पाणि यच्छति।
(क) गुरवे
(ख) गुरुम्
(ग) गुर्वाय
(घ) गुरौ

(ii) (बालक) …………………… मोदकम रोचते।
(क) बालकाय
(ख) बालकैः
(ग) बालकस्य
(घ) बालकेन

(iii) (क्रोश) ………….. कुटिला नदी अस्ति।
(क) क्रोशम्
(ख) क्रोशेन
(ग) क्रोशात्
(घ) क्रोशाय

(iv) (इदम्) ……….. कक्षायाम् बालिकाः पठन्ति।
(क) इमाम्
(ख) अनया
(ग) अस्याम्
(घ) अस्याः

(v) (पितृ) ………………….. मे विश्वासः अस्ति।
(क) पितरि
(ख) पितरम्
(प) पित्रे
(घ) पितुः

13. अधोलिखितवाक्येषु कोष्ठके प्रदत्तशब्दानाम् निर्दिष्टविभक्तेिषु शुद्धानि रूपाणि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत।

(i) प्रातः ………………. प्रकाशः तमः नाशयति। (रवि-षष्ठी)
(क) रवेः
(ख) रविस्य
(ग) रव्योः
(घ) रवीणाम्

(ii) फलानां भारेण तरवः ……………… भवन्ति। (नम्र-प्रथमा)
(क) नम्रान्
(ख) नम्राः
(ग) नम्रः
(घ) नम्रम्

(iii) ……………. बालेषु माता स्निह्यति। (इदम्-सप्तमी)
(क) एतषु
(ख) इमेषु
(ग) एतेषु
(घ) एषु

(iv) यः ज्ञानाञ्जन शलाकया चक्षुः उन्मीलयति तस्मै ………………… नमः। (गुरु-चतुर्थी)
(क) गुरुवाय
(ख) गुरुवे
(ग) गुरवे
(घ) गुरोः

(v) अहो! ………… ईदृशी निपुणता। (बालक-षष्ठी)
(क) बालकान्
(ख) बालकस्य
(ग) बालकेन
(घ) बालकाय

14. अधोलिखितेभ्यः उचितशब्दरूपं चित्वा वाक्यपूर्तिः क्रियताम्।

(i) एतत् जलं ………………… अस्ति।।
(क) नद्यः
(ख) नद्याः
(ग) नद्यै
(घ) नदीनाम्

(ii) …………. सेवनं स्वास्थ्यवर्धक भवति।
(क) फलाय
(ख) फलैः
(ग) फलानाम्
(घ) फलैः

(iii) …………….. उदयः पूर्वस्यां दिशि भवति।
(क) भानवे
(ख) भानोः
(ग) भानुः
(घ) भानुस्य

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